उत्तर प्रदेशनिचलौलमहराजगंज

आंगनवाड़ी सेंटर के नाम पर बड़ा घोटाला! बिना निर्माण कराए 2 लाख रुपये भुगतान का आरोप

रिपोर्ट-चंदन कुमार
महराजगंज। जनपद के निचलौल ब्लॉक अंतर्गत ग्रामसभा खेसरहा शितलापुर में आंगनवाड़ी सेंटर निर्माण के नाम पर बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव में आंगनवाड़ी केंद्र का कार्य पूरी तरह धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा, लेकिन विभागीय अभिलेखों और वेबसाइट पर लगभग 2 लाख रुपये का भुगतान दर्शा दिया गया है। मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है तथा ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों के अनुसार ग्रामसभा खेसरहा शितलापुर में बच्चों और महिलाओं की सुविधा के लिए आंगनवाड़ी केंद्र निर्माण की योजना स्वीकृत हुई थी। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों को बेहतर पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि निर्माण कार्य किए बिना ही सरकारी धन का भुगतान करा लिया गया।
जानकारी के अनुसार समर इंटरप्राइजेज नामक फर्म के पक्ष में बाउचर संख्या
STHSFC/2025-26/P/6[27/APR/2025] के माध्यम से लगभग 2 लाख रुपये का भुगतान दर्शाया गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई जा रही है कि वेबसाइट पर उपलब्ध बाउचर में स्पष्ट तिथि अंकित नहीं है, जिससे पूरे मामले पर और भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वास्तव में भुगतान किया गया है तो संबंधित निर्माण कार्य स्थल पर दिखाई क्यों नहीं दे रहा? वहीं कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है। मामले को लेकर गांव में चर्चा तेज हो गई है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा यह पता लगाया जाए कि आखिर किस आधार पर भुगतान किया गया। यदि निर्माण कार्य नहीं हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित फर्म के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सरकार लगातार भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ लोग योजनाओं को भ्रष्टाचार का जरिया बना रहे हैं। आंगनवाड़ी जैसी महत्वपूर्ण योजना में अनियमितता सामने आना बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर मामला कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

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