खेसरहा-शीतलापुर में अधूरी पुलियों का मामला: शिकायतों के बावजूद नहीं मिला न्याय, जांच व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

निचलौल/महराजगंज। महराजगंज जनपद के निचलौल विकासखंड में विकास कार्यों की गुणवत्ता और कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से जिम्मेदारों के हौसले बुलंद हैं। खेसरहा शीतलापुर में आधा दर्जन पुलियों के निर्माण का मामला भी अब इसी कड़ी में चर्चा का विषय बना हुआ है।

शिकायतकर्ता घनश्याम शुक्ला का आरोप है कि खेसरहा शीतलापुर क्षेत्र में क्षेत्र पंचायत द्वारा कई पुलियों का निर्माण कराया गया, लेकिन निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों की अनदेखी की गई। कई स्थानों पर पुलियों के दोनों तरफ आवश्यक एप्रोच नहीं बनाया गया, जिसके कारण पुलिया और सड़क के बीच आवागमन का संपर्क ही बाधित हो गया। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि कार्य अधूरा रहने के बावजूद संपूर्ण कार्य का भुगतान करा लिया गया।
पुलिया बनी, लेकिन सड़क से संपर्क नहीं
स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ पुलियों के आसपास केले की खेती करने वाले किसानों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने अपने निजी साधनों से कहीं-कहीं थोड़ी बहुत मिट्टी डालकर रास्ता चलने लायक बनाने का प्रयास किया, लेकिन कई स्थानों पर स्थिति इतनी खराब है कि लोगों के लिए पुलिया तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार खेसरहा फार्म के पोखरे के पास बनी पुलिया की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। यहां पुलिया के दोनों ओर करीब दो से तीन फीट गहरी खाई होने का आरोप है। सड़क पर भी पानी भरा रहने के कारण वाहन तो दूर, पैदल आवागमन तक प्रभावित है। सवाल यह है कि जब पुलिया को सड़क से जोड़ने के लिए एप्रोच ही नहीं बनाया गया तो आखिर निर्माण कार्य को पूर्ण कैसे माना गया और भुगतान किस आधार पर किया गया?
किशुनपुर के पास भी हादसे का खतरा
खेसरहा शीतलापुर के टोला किशुनपुर के पास बनी पुलिया को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया के आसपास पर्याप्त मिट्टी और एप्रोच नहीं होने से यहां कभी भी दुर्घटना हो सकती है। लोगों ने जिम्मेदार विभाग से मौके का निरीक्षण कराकर आवश्यक कार्य पूरा कराने की मांग की है।
बहुआर खुर्द में भी एप्रोच का अभाव
इसी तरह ग्राम पंचायत बहुवार खुर्द में क्षेत्र पंचायत द्वारा बनाई गई पुलिया को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिया का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन उसके दोनों तरफ एप्रोच के लिए मिट्टी नहीं डाली गई। परिणामस्वरूप ग्रामीणों का आवागमन बाधित है।

ग्रामीण हैदर अली सहित दर्जनों लोगों ने पुलिया के दोनों तरफ मिट्टी भरवाकर रास्ता सुचारु कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्य का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब उसका वास्तविक लाभ जनता को मिले।
जांच प्रक्रिया पर भी शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल
मामले में सबसे गंभीर सवाल जांच प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मुख्यमंत्री जनसुनवाई/आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत की जांच उसी क्षेत्र पंचायत स्तर पर कराई गई, जहां संबंधित विकास कार्यों को लेकर शिकायत की गई थी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि किसी कार्य में क्षेत्र पंचायत की भूमिका पर ही सवाल उठाए गए हैं तो उसी व्यवस्था से जुड़ी इकाई से जांच कराने पर निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनका आरोप है कि ब्लॉक तकनीकी सहायक द्वारा पंचायत भवन में बैठकर संबंधित लोगों के बयान अपनी सुविधा के अनुसार दर्ज किए गए और बाद में क्षेत्र पंचायत कार्यालय को रिपोर्ट सौंप दी गई।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
तकनीकी सहायक की भूमिका भी सवालों के घेरे में
शिकायतकर्ता ने ब्लॉक तकनीकी सहायक की भूमिका पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि निर्माण कार्यों की तकनीकी निगरानी करने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप और पूर्ण रूप से कराया जाए। ऐसे में यदि पुलिया का निर्माण बिना एप्रोच के अधूरा पड़ा है और उसके बावजूद भुगतान हुआ है, तो इसकी तकनीकी जांच आवश्यक हो जाती है।
चटिया मामले से भी जुड़ रहे सवाल
बताते चलें कि इसी ब्लॉक तकनीकी सहायक को लेकर पूर्व में ग्राम पंचायत चटिया में वृक्षारोपण कार्य से संबंधित कथित अनियमितताओं के आरोप भी सामने आए थे। आरोप लगाया गया था कि ग्राम रोजगार सेवक के साथ मिलीभगत कर वृक्षारोपण के नाम पर फर्जी तरीके से भुगतान कराने का प्रयास किया गया। इस मामले को लेकर ‘निशा प्रहरी’ द्वारा खबर प्रकाशित किए जाने के बाद मामला चर्चा में आया था।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि चटिया प्रकरण और वर्तमान पुलिया निर्माण मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम सत्यता संबंधित विभागीय/स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष से ही निर्धारित होगी।
सवाल सिर्फ पुलिया का नहीं, जवाबदेही का है
खेसरहा शीतलापुर और बहुवार खुर्द की पुलियों का मामला अब केवल अधूरे निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सरकारी धन से निर्माण कराया गया है तो उसका उपयोगिता प्रमाण और गुणवत्ता किस आधार पर सुनिश्चित की गई? यदि कार्य अधूरा है तो भुगतान कैसे हुआ? और यदि शिकायत के बाद भी जांच में अनियमितता नहीं मिलती है तो मौके की वास्तविक स्थिति और जांच रिपोर्ट में अंतर क्यों है?
ग्रामीणों की मांग है कि मामले की स्थलीय जांच किसी स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय अधिकारी या तकनीकी टीम से कराई जाए, निर्माण कार्य की माप, गुणवत्ता और भुगतान से संबंधित अभिलेखों की जांच हो तथा यदि कहीं सरकारी धन के दुरुपयोग या नियमों की अनदेखी प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि शिकायतों और आरोपों के बीच प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और अधूरी पड़ी पुलियों को कब तक आवागमन योग्य बनाया जाता है।



