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21 दिसंबर 2025 को घटित होगी इस साल की सबसे बड़ी रात, और सबसे छोटा दिन

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि शीत अयनांत (Winter Solstice) उत्तरी गोलार्द्ध में वर्ष का सबसे छोटा दिन होता है। एवं इसी दिन दक्षिणी गोलार्द्ध में ग्रीष्म अयनांत, वर्ष का सबसे लंबा दिन भी होता है।

क्या होता है शीत अयनांत (Winter Solstice)- खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि तकनीकी रूप से यह
Latin शब्द sol (Sun) + sistere (to stand still)
होता है या यूं कहें कि
‘Solstice’ एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है “Stalled Sun” यानी “ठहरा हुआ सा सूर्य”। यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है जो पृथ्वी के प्रत्येक गोलार्द्ध में वर्ष में दो बार घटित होती है, एक बार ग्रीष्म ऋतु में और एक बार शीत ऋतु में। इस समय सूर्य मकर रेखा पर लम्बवत चमकता है। इस स्थिति को शीत अयनांत कहते हैं।

क्यों होते हैं छोटे और बड़े दिन _

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दिनों के छोटे-बड़े होने का कारण पृथ्वी का अपने अक्ष पर झुकाव है। पृथ्वी अपने कक्षीय तल पर 23.5° के कोण पर झुकी हुई है। पृथ्वी का आकार भू-आभ (Geoid) होने के कारण इसके लगभग आधे भाग पर सूर्य का प्रकाश पड़ता है अतः आधे भाग पर दिन रहता है, जबकि शेष आधे भाग पर उस समय प्रकाश नहीं पहुँचता है इसलिये आधे भाग पर रात रहती है। पृथ्वी का झुकाव विभिन्न मौसमों के लिये भी उत्तरदायी है। यह घटना वर्ष में उत्तरी से दक्षिणी गोलार्द्ध तक सूर्य की गति और इसके विपरीत वर्ष में मौसमी बदलाव का कारण है। और इस खगोलीय घटना के कारण इस दिन पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव सूर्य से अधिकतम दूर झुका होता है, जिससे उत्तरी गोलार्ध में सूर्य का प्रकाश सबसे कम मिलता है, जिसे ही शीत अयनांत ( Winter solstice) कहा जाता है एवं सांस्कृतिक रूप में इसको “शीतकालीन संक्रांति” भी कहा जाता है लेकिन वैज्ञानिक रूप से इसको शीत अयनांत या Winter Solstice का नाम दिया जाता है।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसी खासियत के कारण उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात घटित होती है, जो सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करने का संकेत देती है, और इसके बाद से दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं।

शीत अयनांत ( winter solstice) के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पृथ्वी का अपने अक्ष पर 23.5 डिग्री झुके होने के कारण घूर्णन करने से मौसम परिवर्तन भी होता है, और पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमते हुए ही आगे भी बढ़ती जाती है और सूर्य का भी चक्कर लगाती है, जिस से इसके अपने अक्ष पर पश्चिमी से पूरब की तरफ घूमने के कारण दिन और रात होते हैं और इस कारण हमें पृथ्वी से सूर्योदय हमेशा पूरब दिशा में ही दिखाई देता है और पृथ्वी द्वारा सूर्य का एक चक्कर पूरा करने पर,पृथ्वी पर एक बर्ष पूर्ण होता है,

कब होती है शीत अयनांत _ वीर बहादुर सिंह नक्षत्र शाला (तारामण्डल) गोरखपुर के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जब पृथ्वी का कोई भी ध्रुव सूर्य से दूर अपने अधिकतम झुकाव पर पहुँच जाता है जोकि एक बर्ष में दो बार होता है, एक बार प्रत्येक गोलार्ध ( उत्तरी और दक्षिणी ) में। उस गोलार्ध के लिए, शीत अयनांत वह दिन होता है जिसमें दिन के उजाले की सबसे छोटी अवधि और वर्ष की सबसे लंबी रात होती है, और जब सूर्य आकाश में अपनी सबसे कम दैनिक अधिकतम ऊंचाई पर होता है, एवं इसके विपरीत घटना ग्रीष्म संक्रांति कहलाती है,

खगोल विद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो शीतकालीन अयनांत उत्तरी गोलार्ध में 20 दिसंबर और 23 दिसंबर के दौरान ही किसी दिन घटित होती है लेकिन इस बार यह खगोलीय घटना सन 2025 मे 21 दिसंबर को घटित होगी, इस दिन सबसे छोटा दिन और वर्ष की सबसे लम्बी रात होती है, इसके बाद उत्तरी गोलार्ध में शनै शनै
दिन लंबे होने और रातें छोटी होने की शुरुआत हो जाती है,

खगोल विद अमर पाल सिंह ने बताया कि
हालाँकि शीतकालीन संक्रांति स्वयं केवल एक पल तक रहती है, अगर विस्तारपूर्वक बात करे तो पाते हैं कि यह एक लैटिन भाषा का शब्द है और यह शब्द उस दिन को भी संदर्भित करता है जिस दिन यह होती है। और यह दो शब्दों के मेल से बना हुआ है ,जिसमें सोल और इस्टिश , जिसमे सोल का अर्थ होता है सूर्य और ईस्ट्स का मतलब होता है इस्थर सा होना, इसीलिए इसे सम्पूर्ण रूप से इस दौरान घटित होने के कारण शीत अयनांत ( Winter solstice) की संज्ञा प्रदान की गई है।

अमर पाल सिंह ने बताया कि
प्राचीनकाल से ही, शीतकालीन संक्रांति कई संस्कृतियों में वर्ष का एक महत्वपूर्ण समय रहा है और इसे विभिन्न त्यौहारों और अनुष्ठानों के रूप में भी मनाया जाता है ,

इस दौरान कितने घंटे का होगा दिन और रात एवं कब घटित होगी यह खगोलीय घटना _
इसके बारे में खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस बार, यह उत्तरी गोलार्ध की इस वर्ष 2025 की सबसे लंबी रात होगी जोकि भारत में लगभग 13 घंटे 34 मिनट्स की होगी, और दिन केबल लगभग 10 घंटे 26 मिनट्स का होगा, और इस बार रविवार 21 दिसंबर 2025 को भारतीय समयानुसार इस खगोलीय घटना का समय शाम लगभग 08 बजकर 33 मिनट्स पर है ,और इसके बाद धीरे धीरे से उत्तरी गोलार्ध में निवास करने वाले देशों के लिए दिन की अवधि में वृद्धि होती जाती है और रातें भी धीरे धीरे से छोटी होती जाती हैं।

 

©खगोलविद अमर पाल सिंह, वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर,उत्तर प्रदेश,भारत।
नोट – इस से संबंधित किसी भी विशेष खगोलीय जानकारी हेतु संपर्क सूत्र +917355546489,
E-mail amarpal2250@gmail.com

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