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अनुपमा (सब की सहेली) सातवां अंक – पर्यावरण विशेषांक

सुशी सक्सेना इंदौर मध्यप्रदेश

अनुपमा (सब की सहेली) पत्रिका का सातवां अंक पर्यावरण विशेषांक का सफल प्रकाशन किया गया। अनुपमा एक ऐसी पत्रिका है जिसमें नये पुराने, छोटे बड़े और देश विदेश के सभी तरह के कलाकारों को अपनी लेखनी चलाने का अवसर प्रदान किया जाता है और उन्हें सम्मान पत्र से सम्मानित किया जाता है। जैसा की सातवें अंक विशेषांक का उद्देश्य था उसी के अनुरूप अपने सृजन के माध्यम से इस अंक में रचनात्मक कौशल प्रस्तुत किया गया है।

प्रकृति और मनुष्य का संबंध आदिम काल से ही अटूट रहा है। हम जिस शुद्ध हवा में सांस लेते हैं, जो जल पीते हैं और जिस मिट्टी से हमारा पोषण होता है, वह सब प्रकृति का ही उपहार है। किंतु, आधुनिकता की अंधी दौड़ और विकास की तीव्र लालसा में हमने अनजाने में उस नींव को ही कमजोर कर दिया है, जिस पर हमारा जीवन टिका है।

हम ‘पर्यावरण विशेषांक’ के रूप में यह संकलन आपके हाथों में सौंप रहे हैं, तो इसका उद्देश्य केवल रचनाएं साझा करना नहीं, बल्कि एक आत्म-चिंतन की शुरुआत करना है। वर्तमान में जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और घटती जैव विविधता केवल वैज्ञानिक चर्चा के विषय नहीं रह गए हैं, बल्कि ये हमारे द्वार पर दस्तक दे रही वे चुनौतियां हैं जिनका सामना हमें आज और अभी करना होगा।
इस विशेषांक के माध्यम से हमने कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को छूने का प्रयास किया है-

जागरूकता: पर्यावरण के प्रति हमारी बदलती संवेदनशीलता और उसके परिणामों का विश्लेषण।

संरक्षण: जल, जंगल और जमीन को बचाने के पारंपरिक एवं आधुनिक तरीकों का संगम।

उत्तरदायित्व: एक नागरिक के रूप में हमारी व्यक्तिगत भूमिका और ‘सतत विकास’ की आवश्यकता।

यह पत्रिका उन मौन आवाजों का प्रतिनिधित्व करती है जो नदियों के सूखते जल, कटते जंगलों और प्रदूषित होती हवा के रूप में हमें चेतावनी दे रही हैं। हमें यह समझना होगा कि पृथ्वी हमें अपने पूर्वजों से विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे अपनी आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है। और यह हमारा नैतिक दायित्व है कि हम उन्हें एक हरी-भरी और सुरक्षित धरती लौटाएं।

आशा है कि इस विशेषांक के लेख, कविताएं और शोधपरक सामग्रियां न केवल आपके ज्ञानवर्धन में सहायक होंगी, बल्कि आपको पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक छोटा ही सही, मगर सार्थक कदम उठाने के लिए प्रेरित करेंगी।
आइए, प्रकृति की इस पुकार को सुनें और एक बेहतर कल के निर्माण का संकल्प लें।

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