एक लाख 61 हजार दीपों से जगमग हुआ मां कामाख्या धाम
लोकप्रिय विधायक रामचंद्र यादव के नेतृत्व में रचा गया नया इतिहास

रुदौली-अयोध्या। आस्था, परंपरा और संस्कृति का संगम बना मां कामाख्या धाम का पावन तट, जहां शनिवार की शाम दीपोत्सव के पावन अवसर पर एक लाख 61 हजार दीपों की ज्योति प्रज्वलित कर नया इतिहास रचा गया। गोमती नदी के तट पर दीपों की रौशनी से पूरा परिसर स्वर्णिम आभा से नहा उठा। दीपों की झिलमिलाहट ने ऐसा दृश्य निर्मित किया कि वहां मौजूद हजारों श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।यह भव्य आयोजन रुदौली विधायक रामचंद्र यादव के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। विधायक यादव के अथक प्रयासों से पिछले पांच वर्षों से मां कामाख्या धाम में दीपोत्सव का आयोजन लगातार होता आ रहा है। जो अब क्षेत्र की पहचान बन चुका है। विधायक यादव ने कार्यक्रम में कहा कि मां कामाख्या धाम हमारी आस्था का केंद्र है। यहां का दीपोत्सव केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। इस बार एक लाख 61 हजार दीप जलाकर हमने न केवल एक नया इतिहास रचा है, बल्कि अपने क्षेत्र की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। यह दीप उत्सव समाज के हर वर्ग की सहभागिता का परिणाम है।उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश भर में आस्था और परंपरा को संजोने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं, उसी कड़ी में मां कामाख्या धाम का दीपोत्सव भी जनता की भावनाओं से जुड़ा आयोजन बन गया है। दीपोत्सव में लगभग 50 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। पूरा गोमती तट दीपों की कतारों से सज गया। और “जय मां कामाख्या” के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। इस आयोजन में राज नारायण गयादत्त इंटर कॉलेज शुजागंज, हंस इंटर कॉलेज रौजागांव, लालाराम कुमार इंटर कॉलेज नरौली, आदर्श इंटर कॉलेज रुदौली, रामलखन इंटर कॉलेज मीरमऊ, संत कबीर दास इंटर कॉलेज बसौढ़ी, रामकुमार इंटर कॉलेज सड़वा, स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज, कलावती इंटर कॉलेज बिहारा, जीआईसी इंटर कॉलेज, कामाख्या विद्या मंदिर और मॉडर्न पब्लिक स्कूल के छात्र छात्राएं वालंटियर के रूप में सक्रिय रहे। इसके अलावा रुदौली व मवई ब्लॉक के अधिकारी कर्मचारी, सीएचसी की आशा बहुएं, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, शिक्षा विभाग के अध्यापक एवं रोजगार सेवक भी आयोजन में सहयोग में जुटे रहे। दीपोत्सव के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के लिए प्रशासनिक टीम भी मुस्तैद रही। चारों ओर दीपों की रौशनी, गोमती नदी के तट पर प्रतिबिंबित झिलमिल प्रकाश और मां कामाख्या धाम की आरती का दृश्य हर किसी के हृदय में भक्ति और गर्व का भाव भर गया।



